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घरेलू हिंंसा यूं ही क्या कम थी कि कोविड-काल ने उसे सुरसा के बदन की तरह बढ़ा दिया

अंदाज कुछ अलग है मेरे सोचने का ...

राजनीति का अपराधीकरण - भारतीय लोकतंत्र का कैंसर

आर्थिक विषमता की खाई पाटनी होगी

शायद अब हमें नहीं रही जरूरत पर दुनिया को आज भी चाहिये गांधी

गांधी जी राष्ट्रपिता थे तो सुभाष बाबू थे 'राष्ट्र नायक'

कभी घर-घर की शान समझे जाने वाले डायरी-कैलेण्डर अब इतिहास के पन्नों में सिमट रहे हैं

सोशल मीडिया पर जहर - बुल्ली बाई ऐप

जिन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे, अफसोस हम न होंगे

दुर्गापूजा - कला, मानव संसाधन का उद्भुत संगम

बिटिया के हाथ पीले कब करें?

महाभारत युद्ध की जड़ में भी थी आार्थिक विषमता

हमारा शहर कोलकाता...इस पर मिर्जा गालिब भी फिदा थे