ए बार पार्क स्ट्रीटे माँ आसछेन

 ए बार पार्क स्ट्रीटे  माँ आसछेन 

मां दुर्गा का आगमन बंगाल की सबसे बड़ी एवं आनंददायक वार्षिक घटना है। जिस दुर्गा पूजा का प्रारंभ 1757 के लगभग हुआ था वह क्रमश: आज बंगाल के घर-घर की पूजा बन गई है। शोभा बाजार की राजबाड़ी कोलकाता में सबसे पुरानी मानी जाती है। कोलकाता में दुर्गा पूजा की समाजशास्त्रीय उत्पत्ति के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करती है। सीधे शब्दों में कहें तो आधुनिक दुर्गा पूजा की उत्पत्ति का श्रेय बंगाली जमींदारों और व्यापारियों और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच साठगांठ को दिया जा सकता है। दुर्गा मां का आगमन धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही सांस्कृतिक एवं प्रशासकीय दृष्टि से भी इसकी अपनी अहमियत है। 19वीं सदी के अंत तक बंगाली आबादी विशेषकर शिक्षित बुद्धिजीवियों में राष्ट्रवाद की भावनाएं उभरी। बंकिम का आनंद मठ सन् 1882 में प्रकाशित हुआ था। आनंद मठ 18 वीं शताब्दी में प्रकाशित हुआ था। आनंद मठ 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के संन्यासी विद्रोह का एक काल्पनिक संस्करण था। उपन्यास में वंदे मातरम काव्यांश को लोकप्रिय बनाया जिसने 'राष्ट्र' को ' माँ' के रूप में कल्पना को लोकप्रिय बनाया। इस प्रकार दुर्गा पूजा अचानक उभरते राष्ट्रवादी प्रोजेक्ट का हिस्सा बन गया। पूजा की उत्पत्ति का श्रेय बंगाली जमींदारों और व्यापारियों को है।


 पार्क स्ट्रीट का ऐलान पार्क दुर्गा पूजा के लिए सजाया जा रहा है।


कहा जाता है कि अत्यधिक धार्मिक क्लाइव ने युद्ध (पलासी की लड़ाई) में मिली जीत का श्रेय अपने भाग्य और ईश्वर को दिया। क्लाइव अपने ईश्वर का धन्यवाद करने के लिए कोलकाता में एक भव्य समारोह आयोजित करना चाहता था लेकिन पूर्व नवाब ने शहर के एकमात्र चर्च को ढ़हा दिया था। क्लाइव के फारसी अनुवादक और करीबी विश्वासपात्र नवकिशन देव ने सुझाव दिया कि वह उनकी हवेली आए और देवी दुर्गा को प्रसाद चढ़ाएं। इस तरह कोलकाता की पहली दुर्गा पूजा शुरू हुई।

कोलकाता में दुर्गा पूजा की रौनक देखते ही बनती है। इसका मुख्य कारण सहज में ही समझा जा सकता है। कोलकाता बंगाल की राजधानी है। यह कभी भारत की राजधानी भी रह चुका है। इसके साथ देश का प्रमुख व्यावसायिक शहर है इसलिए पूजा बाजार की रौनक बेमिसाल है। महानगर का ऐसा कोई इलाका नहीं है जहां दुर्गा पूजा नहीं मनाई जाती हो। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में जैसे पार्क सर्कस, मटियाब्रूज, खिदिरपुर, काशीपुर, हावड़ा के पीलखाना आदि आदि में भी दुर्गा पूजा बड़े उत्साह और उमंग से मनाई जाती है। हां, कोलकाता का पार्क स्ट्रीट अभी तक दुर्गा पूजा के रंग में नहीं रंगा गया था।

पार्क स्ट्रीट कोलकाता का वह दिल है जो अपनी रोशनी और जिंदादिली के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इसे कोलकाता का  'द स्ट्रीट दैट नेवर स्लीप्स' (वह सड़क जो कभी नहीं सोती) भी कहा जाता है। क्रिसमस से लेकर न्यू ईयर तक यहां पैर रखने की जगह नहीं होती। लोग सड़कों पर घूमते हैं। लाइव म्यूजिक का मजा लेते हैं और सांता क्लॉज की झांकियां देखते हैं।

शाम होते पार्क स्ट्रीट का मिजाज बदल जाता है। नाइट क्लब और बार में जाने वाले पार्क स्ट्रीट में मंडराते हुए नजर आते हैं। यहां के स्ट्रीट लाइट्स, गाडिय़ों की कतारें, हंसते मुस्कुराते लोग और हवा में तैरती वेस्टर्न संगीत की धुनें मिलकर ऐसा माहौल बनाती है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

पार्क स्ट्रीट के नाम पर हमारे बुजुर्ग के नाक भौं सिकुडऩे लगता हैं क्योंकि उनकी नजर में पार्क स्ट्रीट इलाका  "काजल की कोठरी पे कैसा ही सयानो जाय, एक लीक काजल की लगी है - पे लागी है।" इस दोहे को चरितार्थ करता है।

 यह विडंबना है कि क्रिश्चियन त्योहारों की जगमगाहट के बावजूद इस क्षेत्र को मौज मस्ती के लिए ही जाना जाता है। यहां के बीचो-बीच एलेन पार्क में क्रिसमस का त्यौहार बड़ी गरिमा से मनाया जाता है। कुछ वर्षों से पिछली सरकार के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यहां क्रिसमस त्योहार के आगाज में शामिल होती थी। 

इस दुर्गा पूजा की ब्रेकिंग न्यूज़ यह है कि पार्क स्ट्रीट में और वह भी एलेन पार्क में पहली बार दुर्गा पूजा सजेगी। इससे पहले इलाका क्रिसमस और उसकी मस्ती के लिए जाना जाता था। पूरे इलाके में नियो साइन से प्रचार किया जा रहा है।  'ए बार पार्क स्ट्रीटे माँ असछेनÓ यानी इस बार पार्क स्ट्रीट में माँ आ रही है।  स्वयं मुख्यमंत्री  शुभेंदु अधिकारी की इस पूजा उद्घाटन करने की बात है। यानी पार्क स्ट्रीट के रंगीन, रोमांटिक और पश्चिमी संस्कृति की पॉकेट में माँ का आगमन एक अचरज की घटना तो है ही किंतु जब बंगाल का कोलकाता का कण-कण मां दुर्गा के आगमन से उपकृत हुआ है तो इस इलाके को ही इस पुण्य से क्यों वंचित रखा जाए? 

पार्क स्ट्रीट के एलेन पार्क में होनेवाली दुर्गापूजा के मुख्य संयोजक कलकत्ता सनातन संघ के प्रधान सचिव नवीन मिश्रा जी ने छपते छपते को बताया कि यह गलत धारणा है कि पार्क स्ट्रीट क्षेत्र में सिर्फ एंग्लो, क्रिश्चियन, यहूदी, मुस्लिम रहते हैं। पार्क स्ट्रीट क्षेत्र मिनी भारत है। यहां मुश्किल से 1 प्रतिशत इसाई एवं 4' मुस्लिम रहते हैं, शेष बंगाली या मारवाड़ी समाज के लोग हैं। श्री मिश्रा ने कहा कि दो बार पहले भी इस क्षेत्र में दुर्गा पूजा मंडप बनाने की कोशिश की थी पर उन्हें परमिशन नहीं  मिला।

उन्होंने यह आश्वस्त किया कि क्रिसमस के समय पहले से कहीं अधिक रौनक व शान के साथ क्रिसमस का त्यौहार मनायेंगे। सभी समूहों को समन्वय स्थापित कर सबको साथ लेकर, क्रिसमस का त्योहार मनेगा ताकि हमारी धर्मनिरपेक्षता की संस्कृति को सुदृढ़ किया जा सके।

फिलहाल - पार्क स्ट्रीट से असहज होने वाले पुराने पीढ़ी के बुजुर्गों को कुछ नागवार गुजरे पर आज के नौजवानों के लिए यह ब्रेकिंग न्यूज़ हैप्पी स्ट्रीट कहीं जाने वाली पार्क स्ट्रीट सिटी ऑफ जॉय के लिए एक सुखद अनुभूति होगी। "

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