हनुमान अंश का बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार!

हनुमान अंश का बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार!

बाहुबली को कटप्पा ने क्यंू मारा- यह फिल्मी पहेली सुलझी भी नहीं थी कि सिनेमा फिर उलझ गये। इस बार गुत्थी यह है कि फिल्म 'हनुमान अंश' जैसी दो करोड़ से कम की लागत वाली एक धार्मिक रुचि की फिल्म ने अब तक बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ की कमाई कैसे कर ली? विशाल चतुर्वेदी फिल्मी दुनिया का अनजाना नाम के निर्देशन में बनी इस फिल्म की शुरुआत सिर्फ 10 लाख रुपये से हुई थी लेकिन तीन हफ्तों बाद लोगों को इतनी भा गई कि कमाई में जबरदस्त उछाल आया। यह फिल्म इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज बनकर उभरी है। छठे हफ्ते में भी सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन कर रही है। साधारण एक्टर शोभिनव सत्या के लीड रोड वाली यह भक्ति प्रधान फिल्म 7 सितम्बर को और दुनिया भर में 11 सितम्बर को रिलीज हुई थी। नीम करोली बाबा की बायोपिक ने विदेशों में भी अपनी रफ्तार बनाए रखी। बम्बइया फॉर्मूले पर बनी बहुचर्चित फिल्म धुरंधर से 4 गुना टिकट बेचे। रिलीज के छठ हफ्ते में किसी फिल्म के लिए ऐसी बढ़त पहले कभी नहीं सुनी गई।


भारतीय सिनेमा के इतिहास में समय-समय पर ऐसी फिल्में आती हैं जो बड़े बजट, भारी भरकम सुपर स्टारकास्ट और तामझाम के सभी दावों को ध्वस्त कर देती है। साल 2026 में यह कारनामा कर दिखाया है भक्ति और अध्यात्म के रंग में रंगी मामूली बजट की फिल्म 'हनुमान अंश' ने। यह फिल्म जब सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी तब इसके बाद न तो कोई बड़ा बैंकर्स था और न ही कोई आक्रमक प्रमोशन। भारत में अभूतपूर्व प्रदर्शन की सुगबुगाहट जब अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म वितरकों को हुई तो होमबेल फिल्म्स ने इसके ओवरसीज (अंतर्राष्ट्रीय) वितरण अधिकारी हासिल किए। देरी से विदेशी बाजारों में रिलीज होने के बावजूद महज दो हफ्तों में फिल्म ने विदेशों से 2 मिलियन डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये से ज्यादा) की कमाई कर ली है।

फिल्म की कथा कोई असाधारण या कोई नया कन्सेप्ट नहीं है। विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म एवं भावुक और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित है। कहानी लक्ष्मीनारायण नाम के एक दु:खी युवक के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी मां के निधन के बाद जीवन, मृत्यु और मानवीय दु:खों के उत्तर तलाशने निकलता है। उत्तर भारत की  यात्रा के दौरान उसकी यह खोज अंतत: उसे महान संत बाबा 'नीम करोलीÓ के रूप मेें रूपांतरित कर देती है। फिल्म में शोभिनव सत्या ने मुख्य भूमिका निभाई है। उनके साथ विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदा पटेल जैसे कलाकारों ने अपने अभिनय से जीवंतता भरी है, हालांकि इनमें कोई नामधारी नहीं है। किन्तु आस्था बेहतरीन निर्देशन और ईमानदार अभिनय के दम पर अजीबोगरीब नाम 'हनुमान अंशÓ साल 2026 की सबसे बड़ी अप्रत्याशित, ब्लॉकबस्टर साबित हुई है।

'हनुमान अंशÓ फिल्म सुपरहिट हो गई है जिसके लिये इस फिल्म के गाने (भजन) लोगों के जुबान पर चढ़ गये हैं और ऐसे चढ़े हैं कि उतरने का नाम ही नहीं ले रहे। सोशल मीडिया हनुमान अंश के दृश्यों एवं चर्चा से भरा पड़ा है। लोकगीत इससे पहले भी फिल्मों में लिये गये हैं। 'तीसरी कसम' में राज कपूर ने कहानी से लेकर गीतों को फणिश्वर रेणु के आंचलिक उपन्यास 'मैला आंचल' से उतारा। हनुमान अंश का सबसे वायरल गाना (भजन) 'जब जिद पर आ गई पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि' तमाम सोशल मीडिया या प्लेटफार्म में जबर्दस्त ट्रैक कर रहा है। इस गाने को साधु तिवारी ने गाया है, जिसपर अब तक लाखों रील्स बन चुकी है। आइये जानते हैं, इस गाने के पीछे एक पौराणिक कथा है। यह भजन बुंदेली भाषा से जुड़ा हुआ भजन है, जो माता पार्वती के अटूट संकल्प और भगवान शंकर के पति के रूप में पाने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति दर्शाती है। इस गाने के पीछे एक पौराणिक कथा है। शिव महापुराण और श्री रामचरित के 'बालकाण्ड' अध्याय में बताया गया है कि जब माता सती के देह त्याग के बाद उनका जन्म पर्वतराज हिमालय और मैनावती के घर में पार्वती के रूप में हुआ है। मां पार्वती बचपन से ही शिव भक्ति में लीन रही थी। तब नारदजी पर्वतराज हिमालय के घर जाकर उन्हें बताया था कि माता सती का पुनर्जन्म मां पार्वती के रूप में हुआ है और भविष्य में उनका विवाह शिव से होना तय है। इसे बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या शुरू कर दी। अपनी तपस्या को प्रबल बनाने के लए माता पार्वती ने धीरे-धीरे अन्न और जल भी त्याग दिया था। उनकी कठिन तपस्या ने देवलोक को भी हिलाकर रख दिया था। माता पार्वती की कठिन तपस्या को देखकर सप्तऋषि उनसे मिलने पहुंचे। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, सप्तऋषि भगवान शंकर को आदेश पर माता पार्वती की परीक्षा लेने पहुंचे थे। यह देखना चाहते थे कि शिव को प्राप्त करने के लिए पार्वती का संकल्प कितना अटल है।

सप्तऋषि योजना के मुताबिक माता पार्वती के पास पहुंचकर भगवान शिव के रूप, वेशभूषा, रहन सहन और जीवन शैली के बारे में बताने लगे ताकि यह सब सुनकर माता पार्वती का मन बदल जाए। ऋषियों ने कहा कि, भोलेनाथ के गले में सांप, सिर पर गंगा, उनके पास रखने के लिए अच्छा घर भी नहीं है और उनके शरीर पर हमेश भस्म लगी रहती है। सप्त ऋषियों का भरोसा था, कि शिव के कठिन और तपस्वी जीवन के बारे में सुनकर माता पार्वती का मन विचलित हो जायेगा।

लेकिन हुआ उसका उल्टा। उन्होंने ऋषियों से विनम्रतापूर्वक कहा कि, उन्होंने मन से भगवान शिव को अपना पति मान लिया है और शिव के अलावा किसी और से विवाह करने के बारे में सोच भी नहीं सकती है। जब तक शिव को पति के रूप में प्राप्त नहीं कर लेंगी, तब तक उनकी तपस्या ऐसे ही जारी रहेगी, चाहे उन्हें इसके लिए अगला जन्म ही क्यों न लेना पड़े। ऋषियों को भी यह बात समझ में आ गई कि माता पार्वती का संकल्प अटूट है। आखिरकार मां पार्वती की तपस्या और अटूट समर्पण से भगवान शिव काफी प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में प्रान्त करने का वरदान दिया।

फिल्म हनुमान अंश का तेलुगू वर्जन भी शायद सिनेमाघरों तक पहुंच जाए। लेकिन पता चला है कि डिस्ट्रिब्यूटर को फिल्म सेंसर बोर्ड से हरी झण्डी नहीं मिली है। फिल्म हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने अगली फिल्म रामबोला की घोषणा की है। इनकी यह फिल्म महाकवि तुलसीदास की जिंदगी पर आधारित होगी।

कुछ पेशेवर फिल्म समीक्षकों का मानना है कि यह पहली बार नहीं है कि एक साधारण सी धार्मिक फिल्म बॉक्स ऑफिस में सुपरहिट हुई है। फिल्म जय संतोषी मां एवं ऐसी कुछ और फिल्मों ने बिजनेस का रेकार्ड बनाया। एक समीक्षक का कहना है कि हनुमान अंश फिल्म एसे समय रिलीज हुई जब कोई दूसरी फिल्म सिनेमाघरों में नहीं थी। कुछ अर्से से कोई हिन्दी फिल्म रिलीज नहीं हुई। ऐसे समय में इस फिल्म को खुला बाजार मिल गया। एक अन्य समीक्षक का कहना है कि कुछ वर्षों मं दिमागी एवं भावनात्मक तौर से लोगों में धार्मिक प्रवृत्ति का इजाफा हुआ है। बढ़ती हुई धार्मिक मनोवृत्ति ने हनुमान अंश को देखने की ख्वाइश बढ़ी और कुछ समीक्षकों को फिल्म सराहना ने बड़ा बाजार पेश कर दिया। जो भी हो हनुमान अंश की सफलता से इसमें किरदारों का बाजार भाव जबर्दस्त बढ़ाया है और नये सितारे पैदा किये हैं जो आने वाली फिल्मों में चमक सकते हैं। 

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