लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया

लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया

जी हां, हमारा ठिकाना बदल गया है जो संख्या में नंबर वन हैं । 37 शेक्सपियर सरणी से इसी सड़क पर पहले नंबर पर आ गए हैं। कई साल पहले थियेटर रोड का नाम बदलकर शेक्सपियर सरणी कर दिया गया था। ऐसा बदलाव सूफी संतों का होता है जिसका हमें सौभाग्य प्राप्त हुआ। विलियम शेक्सपियर दुनिया में थिएटर के पर्यायवाची हैं, अत: यह परिवर्तन बड़ा सराहनीय है। खैर, शेक्सपियर सरणी अथवा थियेटर रोड के 37 नंबर मकान से हम अब आ गए हैं 1 नंबर शेक्सपियर सरणी पर लेकिन 1 से 9 वें में मंजिल पर जाने का हमें अवसर मिला है। कोलकाता के पहले संपूर्ण एयर कंडीशन मार्केट वाले मकान में नौवें तल से हमारा कार्यालय 4 सितंबर को जन्माष्टमी के पवित्र दिन स्थानांतरित हो गया। सुप्रसिद्ध रामपुरिया परिवार द्वारा 1972 में निर्मित इस विशाल मकान की नवीं मंजिल से विक्टोरिया मेमोरियल, सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च स्पष्ट दिखाई देता है। नीचे विशाल मार्केट है जिसमें लगभग ढाई सौ दुकानों में परिवार की जरूरत के हर बेहतरीन सामान उपलब्ध हैं। वैसे तो अब महानगर के सभी मार्केट या मॉल एयर कंडीशन है लेकिन इस श्रृंखला में यह सबसे पहले बना हुआ शीत ताप नियंत्रित बाजार है।


परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है और जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया भी। बदलाव से मनुष्य में विश्वास जागता है और वह अपना रोड मैप को दुरुस्त करता है। छपते छपते अखबार और ताजा टीवी चैनल के ठिकाने का यह पहला नहीं पांचवा पड़ाव है। हमारा उद्गम स्थल महानगर का लैंड मार्क है। चितपुर (रविन्द्र सरणी) मदन मेंशन के हमारे उद्भव स्थल के बाहरी हिस्से में गुजराती परिवारों का आशियाना था। एक समय इस मकान में सिर्फ गुजराती की ही एंट्री थी। बाद में समय के अनुसार परिवर्तन किया गया। अब तो सिर्फ आवास ही नहीं कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कार्यालय खुल गए हैं। मकान हिस्से में बड़े गोदाम थे। जब कोलकाता की ट्राम घोड़ों द्वारा खींची जाती थी उस काल में इन गोदामों में घोड़े का अस्तबल हुआ करता था। धीरे-धीरे समय बदला। ट्राम बिजली से चलने लगी और गोदाम में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गई। लगभग 20 वर्षों तक छपते छपते के प्रकाशन की निरंतर गति देने के बाद ऐसा लगा कि स्थान बदलना चाहिए। इंटाली क्षेत्र में क्रीक रो स्थित एक प्लास्टिक का कारखाना बंद था। वहीं पर छपते छपते ने डेरा डाला। इसकी विशेषता यह थी कि कोलकाता के कई अखबारों के प्रेस इसके आसपास थे। यही नहीं प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालय भी करीब थे। एक समाचार पत्र के लिए इससे उपयुक्त स्थान और क्या हो सकता है?

छपते छपते अखबार का कार्यालय क्रीक रो में जम गया। 20 वर्षों तक छपते छपते का प्रकाशन एवं प्रसारण इसी जगह से हुआ। इस दौर में  ताजा टीवी का जन्म और फिर उसका स्टूडियो क्रीक रो के पीछे क्रीक लेन में स्थापित किया गया। यहां कार्यालय रहते हुए साल्टलेक सेक्टर 5 में ताजा टीवी का स्टूडियो ले जाया गया। इसी समय ताजा टीवी परवान चढ़ा। इसके दर्शक भी बढ़े और पूर्वी भारत में किसी हिंदी समाचार पत्र द्वारा टीवी चैनल शुरू का भी अंजाम देने का यह एकमात्र उदाहरण है। लेकिन क्रीक रो और साल्टलेक दो जगह व्यवस्थाओं से खर्चे में बढ़ोतरी मुंह फाडऩे लगी। तभी शेक्सपियर सरणी (पुराना थियेटर रोड) में कला मंदिर के पास ग्राउंड फ्लोर में सुप्रसिद्ध घनश्याम जी सारडा ने सहयोग का हाथ बढ़ाया। हमने दो जगह की सारी व्यवस्थाओं को शेक्सपियर सरणी के आवश्यकतानुसार बड़े स्थान पर स्थानांतरित कर दिया। काफी ऊंचाई होने के कारण में मेजाइन फ्लोर से हमारा काम शुभवस्थित हो गया। दक्षिण कोलकाता की इस अति महत्वपूर्ण जगह पर हमें प्रतिष्ठा एवं लोकप्रियता दोनों मिली। दस वर्षों के अंतराल के बाद यह जगह भी छोटी पडऩे लगी। छपते छपते और ताजा टीवी का विस्तार के साथ मेधा सम्मान, ताजा डांडिया,  क्विजडम आदि बड़े इवेंट को देखते हुए और बड़ी जगह की तलाश होने लगी। साल्टलेक सेक्टर 5 में ताज़ा टीवी के कार्यालय के उद्घाटन समारोह में उपस्थित इमामी के चेयरमैन श्री राधेश्याम अग्रवाल ने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि यह स्थान भी कम पड़ेगा, इसका विस्तार होगा। राधेश्याम जी का आशीर्वाद फला और शेक्सपियर सरणी जैसे दक्षिण कोलकाता के प्रतिष्ठित स्थान पर हमारा कारोबार बढऩे लगा। दस वर्ष के अंतराल में हमें महसूस हुआ कि मेजाइन फ्लोर से काम नहीं चलेगा। बड़ा फ्लोर स्पेस चाहिए और फिर संयोग से हमें एसी मार्केट की 9वीं मंजिल पर बड़ी जगह मिल गई। सिर्फ किस्मत ही नहीं हमारे मित्रों एवं शुभचिंतकों की शुभेच्छा से एसी मार्केट के भवन की 9वीं मंजिल में यह जगह प्राप्त हुई। इन पंक्तियों के लिखने तक हम इस नए स्थान पर स्थापित हो गए हैं। थोड़ा काम बाकी है जो चार-पांच दिन में पूरा हो जाएगा। 

इस प्रकार चितपुर रोड से क्रीक रो, वहां से साल्टलेक सेक्टर 5 फिर 37 शेक्सपियर सरणी और अब एसी मार्केट की 9वीं मंजिल पर हम आकाश छूने की तैयारी कर रहे हैं। यह आपके भरपूर प्रेम और हमारे कर्मियों के निरंतर प्रयास का प्रतिफल है कि 53 वर्ष के लंबे अंतराल में हम आगे की ओर बढ़ते गए हैं पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। आज हम अपने बीते समय को याद करते हैं तो रोमांचित हो उठते हैं। इस यात्रा में कई साथियों का संबल मिला। इस कालखंड में लगभग सभी पार्टियों की सरकार बनी और बिखरी। 

कोलकाता महानगर और बंगाल का सांस्कृतिक परिवेश और हर कदम पर लोगों का साथ हमारी इस यात्रा के सफलता और सार्थकता का साक्षी रहा है। स्थान मिलना और हमारी आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्था के लिए हम उस हर व्यक्ति के कृतज्ञ हैं जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में हमारा साथ दिया। 

पचास वर्ष से अधिक के अंतराल में छपते छपते परिवार की तीसरी पीढ़ी तैयार हो गई है। एक पौधा जो मैंने रोपा था उसे मेरे पुत्रों ने पुष्पित पलवित किया एवं अब तीसरी पीढ़ी उसे वटवृक्ष का रूप देने में जुटी है। इस यात्रा को मैंने आत्मकथा 'यादों के उजालेÓ का सृजन कर दस्तावेजों का रूप दिया है और देश व समाज को अपने नजरिए से देखकर 'रविवारीय चिंतनÓ के डेढ़ सौ आलेखों का संग्रह अपनी नई पीढ़ी को सौंपा है। वैसे परिवार को मैंने कभी खून के रिश्ते तक सीमित नहीं रखा, उसको व्यापक मित्र मंडली और समाज को समाहित किया। यह कहानी है पिछले 53 वर्ष में उतार चढ़ाव की। 

नये कार्यालय में नये जोश और संकल्प के साथ हम अपने पाठकों एवं संरक्षकों के साथ सभी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

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