'कॉकरोच' जनता पार्टी
चीफ जस्टिस की जरा सी मजाक एक राजनीतिक आंदोलन बन गई!
कॉकरोच एक ऐसा कीड़ा है जिसे देखकर ज्यादातर लोग डर जाते हैं। यह अक्सर गंदी जगहों पर दिखाई देता है। कॉकरोच गंदगी फैलाने और बीमारी बढ़ाने के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एक कॉकरोच कितने समय तक जिंदा रह सकता है? कॉकरोच आमतौर पर गर्म, नम और अंधेरी जगहों पर रहना पसंद करते हैं। यही वजह है कि ये अक्सर किचन, नालियों, बाथरूम और पुराने सामान के आसपास ज्यादा दिखाई देते हैं। कॉकरोच सिर्फ गंदगी में ही नहीं रहते, बल्कि ये कई चीजों को खा भी सकते हैं। इनके भोजन में बचा हुआ खाना, कागज, कपड़े, किताबें और यहां तक कि मृत कीड़े भी शामिल होते हैं।
कहते हैं कि पृथ्वी पर कॉकरोच (तिलचट्टा) सबसे पुरानी प्रजातियों में से एक है। आमतौर पर कॉकरोच 100 दिनों से लेकर 2 साल तक जिंदा रह सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ मादा कॉकरोच करीब दो साल तक भी जिंदा रह सकती हैं। कॉकरोच को लेकर एक और दिलचस्प बात यह है कि ये बेहद कठिन परिस्थितियों में भी जिंदा रह सकते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए लोग कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार ये उनसे भी बच निकलते हैं। यही वजह है कि कॉकरोच को दुनिया के सबसे ज्यादा जीवित रहने वाले कीड़ों में गिना जाता है। कॉकरोच को लेकर और भी कई रोचक तथ्य हैं जिनके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि कॉकरोच करीब 40 मिनट तक अपनी सांस रोक सकता है। दरअसल, इंसानों की तरह वह मुंह से सांस नहीं लेता, बल्कि उसके शरीर में छोटे-छोटे छेद होते हैं जिनसे वह सांस लेता है। यही वजह है कि कॉकरोच कुछ समय तक पानी में रहने के बाद भी जिंदा बच सकता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह भी है कि वह बिना सिर के भी कुछ दिनों तक जिंदा रह सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके शरीर के अलग-अलग हिस्से अपने आप काम कर सकते हैं। सिर कटने के बाद भी उसका शरीर कुछ समय तक चलता रहता है और सांस भी चलती रहती है। हालांकि सिर न होने की वजह से वह खाना और पानी नहीं पी पाता, जिसके कारण कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो जाती है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत
इस टुच्चे से कीड़े के बारे में न चाहते हुए भी लिखना पड़ रहा है कि अचानक मई महीने में उसने नया अवतार लिया और मात्र दो महीने में इसकी चर्चा जोरों से होने लगी और आज कॉकरोच सबकी जुबान पर है। 15 मई 2026 को फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार लोग कॉकरोच की तरह नकल करके मीडिया और आरटीआई एक्टिविस्ट जैसे प्राणी घुस जाते हैं। हालांकि कोर्ट की तरफ से सफाई दी गई कि यह टिप्पणी आम बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं बल्कि फर्जी डिग्री वालों के लिए थी लेकिन 'चिडिय़ा चुग गई खेत '। यानि तब तक सोशल मीडिया पर आक्रोश भड़क चुका था। नीट पेपर लीक और नौकरी न मिलने से परेशान युवाओं के इस गुस्से को अभिजीत दीपके ने भांप लिया। ताडऩे वाले तो कयामत की नजर रखते हैं। उसने अगले दिन यानी 16 मई को एक्स पर मजाक में लिख दिया कि क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं? यही नहीं कॉकरोच जनता पार्टी ' नाम से एक वेबसाइट और गूगल फॉर्म लाइव कर दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके।
संक्षेप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है जिसे अभिजीत दीपके नामक एक राजनीतिक रणनीतिकार द्वारा शुरू किया गया था। अब आप कुछ जानकारी इस नवयुवक अभिजीत के बारे में जानना चाहेंगे।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले अभिजीत दीपके एक प्रोफेशनल पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता में अपनी ग्रेजुएशन की। उसने अमेरिका की प्रतिष्ठित बॉस्टन यूनिवर्सिटी से 'पब्लिक रिलेशंसÓ में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हाल ही में पूरी की है। अभिजीत दीपके का राजनीतिक संदेशों को वायरल कराने का पुराना अनुभव रहा है। साल 2020 से 2022 के बीच वे आम आदमी पार्टी (आप) की सोशल मीडिया टीम के एक प्रमुख वॉलेंटियर थे। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान 'आपÓ के पक्ष में जो आंधी आई थी, उसके पीछे अभिजीत का दिमाग माना जाता है। वे दिल्ली के शिक्षा विभाग के कम्युनिकेशंस एडवाइजर के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिजीत ने इस पार्टी में शामिल होने के लिए जो शर्तें रखीं, वो आज के 'जेन-जीÓ युवाओं को बेहद पसंद आईं। इसकी पात्रता में लिखा था कि बेरोजगार, आलसी, 24 घंटे इंटरनेट पर रहने वाले और प्रोफेशनली दुखड़ा रोने की क्षमता रखने वाले।
देखते ही देखते तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे बड़े नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस व्यंग्य का समर्थन कर दिया। एक जर्नलिज्म पोर्टल के अनुसार, भले ही यह एक मजाक के रूप में शुरू हुआ, लेकिन इसका परिणाम यह हुआ है कि यह पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं के मानसिक तनाव पर एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बन चुका है।
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