हे भगवान!

 हे भगवान!

 भगवान राम के जन्म स्थान अयोध्या पर राम मंदिर का बनना आजादी के पश्चात देश की सबसे बड़ी घटना है। भारत में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे तीर्थ स्थल का रूप दे दिया गया है। प्रतिदिन हजारों लोग राम लला के दर्शनार्थ यहां आते हैं। बारिश,  भीषण गर्मी, ठिठुरती सर्दी की परवाह न करते हुए क्या जवान, क्या बूढ़े, क्या औरत, क्या मर्द, ग्रामीण इलाकों से अपने इष्ट के दर्शन एवं मन्नत मांगने यहां आ रहे हैं। मंदिर के निर्माण एवं उसके मुहूर्त को लेकर विवाद खड़े हुए किंतु जन सैलाब पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन विगत 7 जून को राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना की पहली खबर आई थी जो चौंकाने वाली थी। उस दिन से लेकर आज तक चोरी या डकैती की परत एक-एक करके खुल रही है। अभी रिपोर्ट ही नहीं मिली है कि चढ़ावे की कितनी रकम आभूषण, सोने और चांदी की कितनी शिलाएं गायब हो चुकी हैं। चंदा चोरी की घटना का विस्फोट ज्वालामुखी की तरह हुआ है जिसकी चपेट में अयोध्या व आसपास की जमीन की बिक्री से लेकर कई घोटालें हैं जो देश में संभवत: सबसे बड़ा घोटाला कहा जा सकता है। चूंकि इस महा घोटाले के केंद्र में भगवान राम का मंदिर है इसलिए इसकी गूंज लोगों के दिलों में भी हो रही है।

बायें राम मंदिर एवं दायें ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय (फाइल फोटो)

प्राप्त समाचार के अनुसार घटना की जानकारी के लगभग दो सप्ताह बाद इसकी एफआईआर यानी प्रथम सूचना रपट पुलिस में दर्ज की गई। प्रारंभ में तो राम मंदिर ट्रस्ट के उच्च अधिकारियों ने इसे कोई घटना ही नहीं माना। जब राम मंदिर ट्रस्ट ने एसआईटी यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की विपक्ष ने चुटकी ली कि ट्रस्ट का ही उत्तरदायित्व है और उसीने टीम गठित की है फिर उसकी रिपोर्ट भी उसी ट्रस्ट को सौंप दी गई। इसकी प्रतिक्रिया यह हुई कि लोग कहने लगे कि यह बड़े मगरमच्छ को बचाने की चाल है। फिर यह जुमला आया कि बड़ी मछलियां छोटी मछलियों को खाती है वाली कहावत इस घटना पर लागू होती है लेकिन इसी घटनाक्रम में एसआईटी की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई हो इससे पहले ही राम मंदिर ट्रस्ट के दो बड़े पदाधिकारी चंपत राय, ट्रस्ट के महासचिव एवं ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कुछ ने इसे नैतिकता का तकाजा बताया गया तो कुछ ने कहा यह एक रणनीति के तहत किया गया है। जब इस्तीफा का सिलसिला शुरू हो गया तो वह कहां जाकर रुकेगा कहना मुश्किल है। मजे की बात यह है कि एसआईटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई, पहले ही इस्तीफे ने हड़कंप मचा दिया। चंपत राय की जी की पहले तो लोगों ने बड़ी स्तुति की और कहा कि उनकी लापरवाही हो सकती है किंतु चंदा चोरी में उनका हाथ वाली बात अकल्पनीय है।

दिलचस्प बात यह है कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है उनमें दिव्य यादव, लव कुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला व कुछ ऐसे ही अन्य नाम शामिल हैं जो नोट गिनती से जुड़े हुए थे। इसमें कोई भी ऐसा बड़ा नाम नहीं है। दान चढ़ावा मामले में गबन, घपले के साथ बड़े पैमाने पर जमीनों को खरीदे जाने के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को जमीनों के बारे में कुछ तथ्य दिए हैं। बहुत से लोग अब सामने आए हैं जिनका कहना है कि उन्होंने चांदी, सोना, मूर्ति, पादुका, मुकुट आदि दिये हंै लेकिन उनकी ना तो उन्हें कोई रसीद दी गई और ना ही जानकारी। उन्हें बताया नहीं गया कि उसे मंदिर में लगाया गया है या नहीं। इस मामले को लेकर श्रद्धालुओं में बेचैनी भी देखी जा रही है कि उन्होंने जिस आस्था से राम के नाम पर जो दान दिए थे उनका पता नहीं चल रहा है। 

राम मंदिर में चढ़ावा गबन की जानकारी का खुलासा 7 जून को हुआ था लेकिन यह सब हो रहा था इसकी जानकारी अंदरखाने थी। यही कारण है कि जब एक पक्ष असंतुष्ट हुआ तो वह विभीषण बन गया और उसने सब कुछ सार्वजनिक कर दिया। जिसका परिणाम हुआ कि मामला आगे बढ़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सारे जरूरी काम छोड़कर अयोध्या दौड़े और वहां जाकर प्रेस में वक्तव्य दिया कि 15 दिनों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मुख्यमंत्री जी का दूध और पानी वाला इशारा किस ओर है यह पता नहीं लेकिन अयोध्या में ज्वालामुखी की ज्वाला किस-किस को भस्म करेगी यह आने वाले दिन बताएंगे।

ताजा जानकारी मिली है कि सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए हैं जिसके अनुसार विगत 27 अप्रैल से 5 जून तक 70 बार चोरी होती देखी गई है। कई मामले सामने आए हैं। चढ़ावा, जिसमें नगद और आभूषण शामिल है के अलावा अयोध्या राम मंदिर के आसपास की जमीन की तत्कालिक कीमत से कई गुना कीमत पर जमीन खरीदी और बेची गई। एक मामले में मात्र दो करोड़ की जमीन 10 मिनट में 63 करोड़ की हो गई। इसी तरह ट्रस्ट प्रबंधन पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक जिम्मेदार व्यक्ति ने कहा है कि एसआईटी का अर्थ ' शेयर इन थेफ्टÓ यानी चोरी में भागीदारी का हिस्सा लगाया गया है। एफआईआर, एसआईटी गठन, दो बड़े अधिकारियों के त्यागपत्र एक के बाद एक घटनाक्रम किसी बड़े विस्फोट होने का पूर्वानुमान है।

 मामले के जगजाहिर होने के बाद आपराधिक घटना होने के बावजूद इसमें तत्काल एफआईआर ना करना और आईटी की जांच के बाद उन्हीं लोगों पर एफआईआर करना जिनके बारे में ट्रस्ट को पहले से पता था तो आखिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की चुप्पी किन कारणों से थी। देखना होगा कि क्या इन्हीं के साथ इस मामले का पटाक्षेप हो जाएगा या इन सब के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं उनपर भी कोई आंच आएगी।

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा का चुनाव है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी की घटना एवं राम मंदिर ट्रस्ट में मची भगदड़ का सीधा असर देश के सबसे बड़े प्रदेश पर पड़ेगा, इसमें कोई शक नहीं है।

राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा स्थल है। इसका निर्माण और वहां रामलला को विराजमान करना न केवल राम मंदिर ट्रस्ट अपितु देश भर की जनता के लिए बेहद अहम और भावुक पल था। इस कार्य के लिए मंदिर ट्रस्ट की काफी तारीफ हुई थी। वहीं देश भर का विश्वास भी ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय और इसके प्रति जगा था। लेकिन आज आस्था  चूर चूर हो गई।

भारत की धर्म परायण जनता पर चोरी की इस घटना का कोई विपरीत असर नहीं हुआ। अयोध्या से आई रिपोर्ट के अनुसार अखबारों में सुर्खियां एवं टीवी में मसालेदार खबरों के बाद भी राम भक्तों के सैलाब में कोई फर्क नहीं आया है। लेकिन विधानसभा में शीघ्र होने वाले चुनाव में विपक्षी दलों एवं सत्ता पक्ष अपनी-अपनी पेटियां बांध ली हैं। अब देखना है घटनाक्रम के वायुयान की 'चुनावी रनवेÓ में लैंडिंग कैसे होती है। 

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