एलन मस्क- दुनिया के सबसे बड़े धन कुबेर अब अंतरिक्ष में उद्योग लगाने की सोच रखते हैं
अमेरिका के एलन मस्क दुनिया के पहले 'ट्रिलियन' (खऱाबपति) बन गए हैं। पिछली 12 जून को अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डेक पर उनकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स की लिस्टिंग हुई जिसने मस्क की दौलत को एक नए ब्रह्मांड में पहुंचा दिया है। स्पेसएक्स ने 135 डॉलर प्रति शेयर की कीमत पर 75 बिलियन डॉलर (लगभग 7. 15 लाख करोड़ रुपए) जुटाए हैं। इसने वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ दिया। लिस्टिंग के साथ ही स्पेसएक्स की कुल मार्केट वैल्यू 1. 77 ट्रिलियन डॉलर (करीब 168 लाख करोड़ रुपए) हो गई। पब्लिक इश्यू से मिले पैसों से मस्क अंतरिक्ष में तैरते हुए एआई डेटा सेंटर्स बनाएंगे। मंगल ग्रह पर बस्ती बनाने की तैयारी है। इस पृथ्वी पर उनके अपार असीम धन को खपाने का कोई साधन नहीं है इसलिए ब्रह्मांड से परे अंतरिक्ष में उद्योग लगाने की सोच रहे हैं दुनिया के सबसे बड़े धन कुबेर। रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक मस्क के पास स्पेसएक्स के करीब 4.8 बिलियन शेयर हैं। साथ ही उनके पास 350 मिलियन स्टॉक ऑप्शंस हैं। कुल मिलाकर कंपनी में मस्क की 38' हिस्सेदारी उनकी वित्तीय शोहरत की मुख्य वजह है। कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने कहा कि स्पेसएक्स साल 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का रेवेन्यू ला सकती है। हालांकि, साल 2025 में कंपनी का राजस्व 18.7 बिलियन डॉलर रहा है और कंपनी अभी तक प्रॉफिटेबल नहीं हुई है।
एलन मस्क दक्षिण - कनाडाई वव्यवसाई और इंजीनियर हैं। अपार धन के मालिक और विश्व के सबसे बड़े धन कुबेर ही नहीं वे अपने करिश्माई व्यक्तित्व के कारण किंवदंती बन गए हैं। 28 जून 1971 को जन्मे मस्क कई तकनीकी और एयरोस्पेस कंपनियों के मालिक और संस्थापक हैं। उनका जन्म दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में हुआ था। बचपन से ही उन्हें किताबों और कंप्यूटर में गहरी रुची थी। 17 साल की उम्र में कनाडा चले गए और बाद में अमेरिकी यूनिवर्सिटी से भौतिक और अर्थशास्त्री में डिग्री हासिल की। वह इतिहास के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं जिनकी कुल संपत्ति वन ट्रिलियन डॉलर से ऊपर हो गई है। मस्क यूं ही एक किंवदंती नहीं बने हैं। मस्क की सबसे बड़ी खूबी है - जोखिम लेना। दूसरी है - दूर की सोच। स्पेसएक्स कंपनी को ही ले लीजिए। यह एक रॉकेट कंपनी है। लेकिन रॉकेट कंपनी तो और भी कई हैं। वह तो इतनी धनी नहीं है फिर स्पेसएक्स में क्या खूबी है? स्पेसएक्स को मस्क की सोच ने ही अलग बनाया है। इसके पहले रॉकेट का अर्थ होता था एक बार आकाश की ओर उड़ चला तो वह उड़ान सफल हो या असफल रॉकेट खत्म। मस्क ने स्पेसएक्स को इस तरह बनाया कि हमारे रॉकेट अंतरिक्ष में अपना काम करके वापस लौटेंगे ताकि हम बार-बार उन्हें उपयोग कर पाएं। अब उनके रॉकेट अंतरिक्ष तक उड़ान भरते हैं और सकुशल वापस लौट आते हैं।
इससे भी बड़ी बात मस्क ने वह सोचा जो कोई सोच नहीं रहा था। इंटरनेट को शिकंजे से बाहर करना। इंटरनेट की पारंपरिक तारों वाले तरीकों से नहीं अंतरिक्ष में उड़ान भर रहे उपग्रह के जरिए उपलब्ध कराना। स्टारलिंक सेवा 160 देश में उपलब्ध है। इसके लिए ना तार बिछाने की जरूरत है ना टावर लगाने की। छत या छोटा सा एंटीना और आपके घर तक निर्बाध इंटरनेट की पहुंच शुरू।
मस्क यहीं नहीं रुके, अब वह डेटा सेंटर्स को भी अंतरिक्ष में बनाने की योजना बना रहे हैं, ताकि डेटा पर भी किसी एक सरकार का नियंत्रण न रहे। स्पेसएक्स की इस रणनीति पर निवेशकों ने सबसे बड़ा दांव खेला है। हमारे देश में जब कोई असफल हो जाता है तो उसको लोग उसे खारिज कर देते हैं। उसकी हिम्मत नहीं होती कि वह फिर उठ खड़ा हो किंतु अमेरिका में सोच ठीक इसके विपरीत है। सफल होने की दोबारा या तीसरी बार भी प्रयास के लिए मौका दिया जाता है। वहां प्रतिभाओं पर पूरी आस्था रहती है और आगे पढऩे के अवसर मिलते हैं। यही वजह है कि हम चमत्कार में विश्वास करते हैं और अमेरिकी जैसे देश नए-नए अविष्कार पर।
अब मस्क का नया अवतार भी कम दिलचस्प नहीं है। दुनिया के पहले ट्रिलियन और स्पेस एक्सप्लोरेशन के प्रणेता एलन मस्क अपनी अकूत दौलत से निश्चित नहीं है। इन दिनों पैसा से ज्यादा आबादी बढऩे (प्रोनेटेलिज्म) को लेकर चर्चा में है। मस्क का मानना है कि दुनिया के समझदार लोगों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए और इसके लिए वे स्पर्म डोनेशन को एक बेहतरीन जरिया मानते हैं।
हालांकि, उनकी इस 'मस्कियन सोचÓ के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन देशों के कड़े कानून हैं जहां स्पर्म डोनर की पहचान गुप्त रखी जाती है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल विज्ञान खड़ा करता है-क्या एक जीनियस पिता के स्पर्म से पैदा होने वाला बच्चा भी जीनियस ही होगा ?
मस्क का मानना है कि स्मार्ट लोगों (जीनियस) को ज्यादा बच्चे पैदा करने में मदद करनी चाहिए। मस्क की सोच के हिसाब से, ऐसा करना समाज के लिए अच्छा है। ऐसा करने का सबसे असरदार तरीका है अपना स्पर्म डोनेट करना। बता दें कि 2024 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद मस्क के स्पर्म डोनेशन के जुनून के बारे में मीडिया में खबरें आईं। एक रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क ने सिलिकॉन वैली की एक डिनर पार्टी में शामिल एक कपल को अपना स्पर्म डोनेट करने का ऑफर दिया था। हालांकि, मस्क ने इस बात को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।
सवाल है कि असली पिता कौन है-मस्क और उनके जैसे तमाम संभावित स्पर्म डोनर्स (जो चाहते हैं कि दुनिया को पता चले कि उनके स्पर्म से बच्चे पैदा हुए हैं) के सामने सबसे बड़ी कानूनी अड़चन है। दुनिया के अधिकांश हिस्सों में स्पर्म डोनर की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इसके तहत न तो बच्चे को अपनाने वाले माता-पिता को डोनर का नाम बताया जाता है, और न ही खुद डोनर कर सकता है। कानूनी तौर पर अपनी पहचान उजागर की पहचान बताना आसान है, जैसे-हालांकि, अपवाद भी है जहां डोनर यूके, जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और यूएस के कुछ राज्य जैसे कैलिफोर्निया, रोड आइलैंड, कनेक्टिकट। वहीं भारत में आईसीएमआर की गाइडलाइंस के मुताबिक डोनर की पहचान गुप्त रखना जरूरी है।
डोनर की पहचान को लेकर सबसे बड़ी समस्या यह है कि सभी डोनर अपनी पहचान जाहिर करने के लिए तैयार नहीं होते। वहीं, सभी लेने वाले भी अनजान डोनर के विचार से सहमत नहीं होते। अलग-अलग देशों में स्पर्म बैंक और बायोएथिसिस्ट (जैविक नैतिकता के जानकार) के बीच भी अपनी-अपनी अंदरूनी बहसें चलती आम सहमति थी, उसमें अब बदलाव रहती हैं। लेकिन गुमनामी को लेकर जो आम सहमति थी, उसमें अब बदलाव आ रहा है।
सही जगह का चुनाव: अगर आप एलन मस्क के जैसी सोच रखने वाले डोनर, तो आपके लिए उन देशों या राज्यों में स्पर्म डोनेट करना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होगा जहां कानूनन मां और बच्चे को डोनर की पहचान जानने का अधिकार होता है। करीब एक दर्जन बच्चों के पिता और आबादी बढ़ाने के कट्टर समर्थक मस्क, शायद अब दौलत कमाने से ज्यादा स्पर्म डोनेट करने को लेकर गंभीर हैं।
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