मित्रता की पहचान संकट के समय ही होती है

मित्रता की पहचान संकट के समय ही होती है 

रविवारीय चिंतन लिखने बैठा ही था, काफी देर तक सोचता रहा कि इस बार क्या लिखूं। पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान भारतीय मेहमान ईरान की सबमरीन को अमेरिका द्वारा भारतीय सीमा के बाहर आते ही नष्ट करने पर लिखूं कि यह बस वैसा ही है कि किसी को दावत पर हमने अपने घर आमंत्रित किया और मेहमान जब लौट रहे थे तो मेरे घर के बाहर किसी ने उसे गोली से भून दिया, और ऐसी घटना पर मैं चुप्पी साधे हुए हंू। युद्ध के इतिहास में भी ऐसी घटना नहीं सुनी। पर कहते हैं कि युद्ध और प्रेम में सब जायज है। ईरान ने भारत के प्रति प्रेम दर्शाकर अपना युद्ध पोत फ्रेंडशिप शो के लिए विशाखापट्टनम भेजा जहां राष्ट्रपति ने उसका स्वागत किया। उसी को नष्ट कर दिया जिसके परिणाम स्वरुप 100 ईरानी नागरिक भी मारे गए। ईरानी विदेशमंत्री अब्बास अराधची के अनुसार वे भारतीय नौसेना के मेहमान थे, उनपर बिना किसी वार्निंग के हमला किया गया।

इतनी बुरी और शर्मनाक खबर पर निराशा वह आत्मग्लानि का भाव रोक नहीं पा रहा था कि जैन समाज में सक्रिय श्रीमती अंजू सेठिया ने फेसबुक पर एक खबर पोस्ट की तो अवसाद से कुछ राहत मिली। एक तरफ मेहमान को मारकर जो हम पर कलंक थोपा गया था दूसरी तरफ युद्ध में घिरे जान जोखिम लेकर कहीं शरणागत को ससम्मान अपने घर में जगह देकर एक सज्जन ने भारतीयों को अपने रक्षक भाई पर गर्व करने का एहसास दिलाया। भेजी गई खबर हूबहू नीचे उद्धृत कर रहा हूं-


मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने हजारों पर्यटकों और प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। इस तनाव की वजह से यूएई सहित कई खाड़ी देशों में उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

ऐसे में दुबई घूमने गए या वहां काम करने वाले सैकड़ों भारतीय वहीं फंस गए हैं। पैसे खत्म होने और सिर पर छत न होने की इस भीषण मुसीबत में राजस्थान के एक दरियादिल बिजनेसमैन ने देवदूत बनकर उनकी मदद की है।

फ्लाइट्स कैंसल होने से सडक़ों पर आ गए थे लोग

नागौर जिले के मेड़ता सिटी के रहने वाले धीरज जैन, जो पिछले 11 वर्षों से यूएई में एक सफल रियल एस्टेट डेवलपर हैं, ने संकट में फंसे देशवासियों के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए हैं। धीरज जैन ने बताया कि युद्ध की स्थिति के कारण अचानक फ्लाइट्स और होटल बुकिंग्स कैंसल होने लगीं। कई भारतीय पर्यटक सीमित बजट के साथ वहां गए थे, और अचानक आए इस संकट ने उनके सामने रहने और खाने-पीने की गंभीर समस्या खड़ी कर दी थी।

सोशल मीडिया पर नंबर जारी कर कहा- ‘घबराएं नहीं, मैं हूँ न’

जैसे ही धीरज को पता चला कि भारतीय लोग सडक़ों और एयरपोर्ट्स पर परेशान हो रहे हैं, उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर अपना मोबाइल नंबर जारी कर दिया। मैसेज दिया कि जिस भी भारतीय के पास रुकने का ठिकाना नहीं है, वह बेझिझक उनके अजमान स्थित फार्महाउस पर आ सकता है। मैसेज वायरल होते ही उनके पास फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई।

खुद भेजी 11 गाडिय़ां, 200 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया

धीरज जैन केवल रहने की जगह देकर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने देखा कि कई लोगों के पास फार्महाउस तक पहुँचने के लिए साधन भी नहीं हैं। उन्होंने तुरंत अपनी 11 गाडिय़ां दुबई और आसपास के शहरों में भेजीं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित अपने ठिकाने पर बुलवाया। फिलहाल उनके फार्महाउस पर करीब 200 भारतीय ठहरे हुए हैं, जिनके खाने-पीने और रहने का पूरा खर्च धीरज खुद उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे 300 लोगों तक के रहने का इंतजाम कर सकते हैं।

देश लौट सकता था, पर अपनों को अकेला नहीं छोड़ सका’

धीरज जैन का कहना है कि उनके परिवार वाले भारत में उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित थे। वे चाहते तो खुद के लिए निजी व्यवस्था कर भारत लौट सकते थे, लेकिन उन्होंने सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा,  ‘इस संकट की घड़ी में अपने देशवासियों की मदद करना मेरा पहला कर्तव्य है।’ दिलचस्प बात यह है कि भारतीयों के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिक भी उनसे मदद मांग रहे हैं और धीरज यथासंभव उनकी सहायता कर रहे हैं।

मुझे यह लिखते समय बरबस याद आई वह घटना जो भूमध्य सागर में 6 वर्ष पूर्व बिताई सात रातों के सफर के दौरान मेरे साथ घटी। 

स्पेन के बार्सिलोना शहर में दिन दिन भर घूम कर मैं शाम को परिवार के कुछ सदस्यों के साथ जा रहा था अपने क्रूज की तरफ जो समुद्र तट पर हमारा इंतजार कर रहा था। बड़ी मुश्किल से टैक्सी मिली, हम चार लोग बैठ गए। कुछ दूर ही गए थे की टैक्सी वाला स्पेनिश ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी और बड़े गुस्से में हमें उतर जाने को कहा। ड्राइवर का कहना था कि टैक्सी में चार लोग ही सफर कर सकते हैं। हमारे साथ 8 महीने का एक छोटा बच्चा भी गोद में था। उसको लेकर हम पांच हो गए। उसने एक न सुनी और बेइज्जती ऊपर से। अब हमारे होश उडऩे लगे। क्रूज के छूटने का समय हो रहा था। दूसरी टैक्सी नहीं मिल रही थी। भय से आक्रांत थे कि क्या बार्सिलोना के फुटपाथ पर परिवार के साथ रात बितानी पड़ेगी? तब तक एक टैक्सी ने हमें बैठा लिया। जान बची।  उसने बताया कि यहां टैक्सी में चार से अधिक मुसाफिर लेने से टैक्सी पर बड़ा फाइन लगता है। नये टैक्सी ड्राइवर ने कहा कि बच्चे को एकदम नीचे छिपा लीजिए। और कुछ देर में टैक्सी से हम बंदरगाह के उसे लोकेशन पर पहुंच गए जहां हमारा क्रूज खड़ा था। टैक्सी में बातचीत के दौरान पता चला कि वह टैक्सी ड्राइवर पाकिस्तान का प्रवासी था। उसने बताया कि यहां भारत पाकिस्तान के प्रवासियों में बड़ा प्रेम है और हम एक दूसरे की मदद करते हैं।

ईरान के हमारे मित्र जहाज पर अमेरिकी आक्रमण ने हमको याद दिलाया कि वक्त पर काम आए जो वही दोस्त होता है। युद्ध और प्रेम में सब जायज है। यही सिर्फ कहनेे की बात है। प्रेम और भाई चारे से युद्ध भी जीता जा सकता है। एक भारतीय होने के नाते हमको यही संस्कार मिले हैं। 

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