यूं ही नहीं कोलकाता भारत का साहित्यिक महातीर्थ कहलाता है

यूं ही नहीं कोलकाता भारत का साहित्यिक महातीर्थ कहलाता है

कोलकाता का पुस्तक मेला महानगर का दुर्गा पूजा के बाद सबसे बड़ा एवं आकर्षक मेला है। बंगाली परिवार जिस तरह दुर्गा पूजा में एक पंडाल से दूसरे पंडाल तक फुदक - फुदक कर मूर्तियां देखते हैं वही दृश्य पुस्तक मेले में नजर आता है। एक स्टॉल से दूसरे स्लॉट में जाकर अपने मनपसंद पुस्तकें देखता है और खरीदता भी है। खाने पीने के स्टाल भी हैं। पुस्तक खरीद के साथ खाद्य स्टॉलों में खड़े होकर पेट पूजा भी होती है। यही नहीं साल्टलेक सेंट्रल पार्क में लगे इस मेले में एक अजीब माहौल देखा जाता है। विंटर कार्निवल की तरह इसमें मनोरंजन की भी मस्ती रहती है। स्टॉल के सामने आम लोगों का मेला भी दर्शनीय होता है। उनकी कला, संस्कृति और बसंत ऋतु की मादकता मिलकर लोगों को आकृष्ट करती है। 

पुस्तक मेला कोलकाता का पुराना अड्डा है और हर वर्ष इसकी खूबसूरती में निखार आया है। कभी ब्रिगेड के पास आईटीएफ पवेलियन के पास लगने वाला मेला को सेंट्रल पार्क में शिफ्ट किया गया। कई लोगों को आशंका हुई कि सुदूर मेला में पहुंचने में असुविधा होगी। शायद संख्या कम हो जाए पर यह धारणा गलत साबित हुई। भीड़ पहले से और बढ़ी। पुस्तक मेले में प्रवेश को नि:शुल्क किया गया। खैर इससे भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा। अब हर वर्ष पुस्तक मेला में ‘फूट फॉल’ जस का तस ही रहता है। मेला का आकर्षण सिर्फ पुस्तकों तक सीमित नहीं है। कोई गीत गा रहा है तो कोई कविता की आवृत्ति। बीच-बीच में आसन जमाए आपको चित्रकार मिलेंगे जो अपने हाथों का हुनर रंगों में ढालते हैं। 

पुस्तक मेला एक सनसनी की तरह आता है 12 दिन के अंदर लेखक प्रकाशक और पाठक सभी को ऐसा आकर्षित करता है मानो वहां नहीं गए तो कोई अपराध कर दिया हो। आप भी विशिष्ट हैं, यह बोध भी करता है। यह विशिष्टता बांध कुछ मायनों में लाभदायक है। अव्वल तो आप लेखक हैं। आपकी गरिमा अलग है। मेले में जो आपको पहचानता है आपके साथ फोटो खिंचवाकर आपकी गरिमा में और वृद्धि करता है। प्रकाशक भी चाहेंगे कि आप आए और साथ में कुछ समान धर्म के मित्रों को भी लाइये तो उनका स्टाल भरा भरा दिखेगा। नवोदित लेखकों के मन में भी उस प्रकाशक के लिए आकर्षण होगा। बहुत सारे बिंदु हैं आपकी अपनी संतुष्टि भी होगी। जो लोग कोलकाता में नहीं रहते हैं उन्हें यह और ललचाता है।

 इस बार बांग्लादेश को इस पुस्तक मेले से बाहर रखा गया है। बांग्लादेश से हर साल बड़ी संख्या में आने वाले पुस्तक प्रेमी भी नहीं आएंगे। कैसी विडंबना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को टी-20 विश्व कप के अपने मैचों को श्रीलंका में स्थानांतरित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया। आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया की मैच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे। भारत में टूर्नामेंट के किसी भी स्थल पर बांग्लादेश के खिलाडिय़ों, अधिकारियों या प्रशंसकों की सुरक्षा में कोई वास्तविक खतरा नहीं है। लेकिन बांग्लादेश को पुस्तक मेले में कोई जगह नहीं मिली है। इसमें पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश दोनों के पुस्तक प्रेमी निराश हुए हैं।


पुस्तक मेले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी हुई 9 पुस्तकों का विमोचन हुआ। उनकी एसआईआर संबंधी परेशानियों एवं अनुभवों पर लिखी गई पुस्तक की प्रतीक्षा है। संभवत एक दो दिनों में ही वह मेले में बिक्री हेतु शामिल होगी। ममता बनर्जी बंगाल की पहली मुख्यमंत्री है जिनकी लिखी हुई पुस्तकें मेले में न सिर्फ रखी जाती है बल्कि बिक्री भी होती है। कहा कि वे किताब लिखना पसंद करती हैं। कंप्यूटर पर काम करना उनको पसंद नहीं है। वह कहती हैं कि हाथ से लिखने से जो संतोष है उसकी कोई तुलना नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने निजी जीवन और आय को लेकर भी खुलासा किया। ममता ने कहा कि उनकी एकमात्र आय किताबों से होने वाली रॉयल्टी है और उन्होंने कभी सरकार से कोई पैसा नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वह चाय भी अपने पैसे देकर पीती हैं। सर्किट हाउस में भी भाडा देकर रहती हैं। उन्होंने पुस्तक मेले के उद्घाटन अवसर पर यह सब कहा और अंत में बोली जब तक मैं जीवित हूं पुस्तक मेले में आती रहूंगी। मुख्यमंत्री की 153 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। इस बार पुस्तक मेले में उनकी किताबों की संख्या बढक़र 162 हो जाएगी। 

पिछले साल 27 लाख से अधिक लोग पुस्तक मेले में पहुंचे थे। 23 करोड़ रुपए से अधिक की पुस्तकों की बिक्री हुई। इस वर्ष कुल 1100 स्टॉल हैं। 20 से अधिक देशों की भागीदारी इस मेले को वैश्विक पहचान देती है।

अगले साल कोलकाता का पुस्तक मेला अपने 50 वर्ष पूरा करेगा और इसकी ऐतिहासिक यात्रा की सुगबुगाहट इस साल से ही शुरू हो चुकी है। मेला प्रांगण में 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में ‘बोई तीर्थ’ बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मेला उद्घाटन के समय इसके लिए 10 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करने की घोषणा भी कर दी। मुख्यमंत्री ने ‘बोई तीर्थ’ का एक रफ नक्शा भी बना कर तैयार कर दिखाया। 

15 वर्षों के अंतराल के पश्चात कोलकाता पुस्तक मेले में चीन पवेलियन खोला गया है। इस पवेलियन में भारत और चीन के बीच मधुर संबंधों को लेकर कई पुस्तकेंउपलब्ध करा दी गई है। वैसे 20 देश के प्रकाशक पुस्तक मेले में शामिल हुए हैं इस वर्ष का थीम देश है अर्जेंटीना।

अब बंगाल में सिर्फ कोलकाता में ही नहीं कई शहरों और मोहल्लों में पुस्तक मेला आयोजित होता है। पुस्तक मेलों की इस बेजोड परम्परा से कोलकाता और बंगाल का भारत में ऐक अलग स्थान बन गया है। जहां एक ओर कोलकाता भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहलाता है वहीं यह साहित्यिक तीर्थ भी कहलाता है। विश्वकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर और विद्रोही कवि नजरुल का बंगाल पांच नोबल पुरस्कार विजेताओं की जन्म भूमि एवं कर्म भूमि भी है। 

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