उडऩे वाली हर लडक़ी परी नहीं होती
दो भारतवंशी महिलाओं की अन्तर्व्यथा
भारतीय मूल की दो अमरीकी महिलाओं की पीड़ा ने मुझे कुछ लिखने के लिए बाध्य किया। हम सभी उन्हें जानते हैं, उनका नाम सुर्खियों में रहता है पर वे जिस अन्तव्र्यथा से गुजर रही हैं उसका शायद हमें अन्दाजा नहीं है। पहले मैं बात करूं सुनीता विलियम्स की जो अंतरिक्ष में उड़ रही हैं और वह कब तक उड़ेंगी पता नहीं। उसको भी नहीं मालूम कि जिस मिशन के लिए वह भेजी गयी है उसके लिए उन्हें कब तक यात्रा करनी होगी। इसी मिशन पर कल्पना चावला को भेजा गया था और उसने अमरीकी अंतरिक्ष अभियान की फतह के लिए अपने प्राण तक दे दिये थे। मुझे नहीं मालूम कि अमेरिका में उनके लिए कोई स्मारक बनाया गया या नहीं। भारत में तो नहीं बना, शायद इसलिए कि वह भारत भूमि से गयी थी। पर उन्हें किसी वजह से भारत छोडक़र जाना पड़ा। कल्पना ‘नासा’ के अंतरिक्ष अभियान का हिस्सा बनी, वैज्ञानिकों के मिशन में उसने अंतरिक्ष अभियान में अंतोतगत्वा अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब वह अंतरिक्ष में उड़ रही थी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्द्रकुमार गुजराल ने उनसे दूरभाष से बात की थी और कहा था उनके प्रधानमंत्री काल की सबसे अविस्मरणीय उपलब्धि यही है कि उन्होंने कल्पना चावला से अंतरिक्ष में बात की।
सुनीता विलियम्स
अब भारत की ही बेटी जिसके भाग्य में कहीं और का दाना-पानी लिखा था, अमेरिकन नागरिक के रूप में तीसरी बार अंतरिक्ष का भ्रमण कर रही है। दो महीने से अधिक बीत गये हैं और अभी उनके पृथ्वी पर वापस लौटने की उम्मीदें कम है। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) का कहना है कि सुनीता विलियम्स और अंतरिक्ष में उनके सह यात्री बुच विल्भोर को वर्तमान में पृथ्वी पर वापस लाना ‘बहुत जोखिम भरा’ है। यानी कि एक सप्ताह की परीक्षण उड़ान अब लगभग 8 महीने तक चलेगी।
कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने पर शरीर पर विपरीत असर पड़ता है। सुनीता के शरीर, आंख और डीएनए में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ‘इसरो’ के पूर्व वैज्ञानिक डा. विनोद कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान एस्ट्रोनॉट्स के शरीर की 50 फीसदी लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और मिशन के चलने तक ऐसा होता रहता है। यानी शरीर में खून की कमी हो जाती है। इसे स्पेस एनीमिया कहा जाता है। इसी वजह से चांद, मंगल या उससे दूर की अंतरिक्ष यात्राएं करना एक बड़ी चुनौती है।
अंतरिक्ष में सुनीता को उच्च स्तर के रेडिएशन (विकिरण) का सामना करना पड़ेगा। भविष्य में उनमें कैंसर व अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। नासा ने इस वर्ष 24 फरवरी को बताया था कि सुनीता विलियम्स 2025 तक धरती पर लौटेंगी। ‘नासा’ ने आखिरकार यह मान लिया कि आईएसएस पर फंसे दोनों एस्ट्रोनॉट को बोइंग के नए स्टार लाइनर में लाना खतरनाक हो सकता है। लॉन्च के बाद 25 दिनों में स्पेस क्राफ्ट के कैप्सूल में 5 हीलियम लीक हुए। 5 थ्रस्टर्स काम करना बंद कर चुके थे। स्पेस में मौजूद क्रू और अमेरिका के ह्यूस्टन में बैठे मिशन के मैनेजर मिलकर भी इसे ठीक नहीं कर पा रहे हैं।
अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा अपने अंतरिक्ष यात्रियों की जान को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाह रहा है। लेकिन मिशन की असफलता से सुपर पावर की साख को जो झटका लगेगा, उसकी बड़ी कीमत होगी। वह भी जब उसके नम्बर वन के ओहदे को चुनौती देने वाला चीन अंतरिक्ष अभियान में नित नयी सफलताएं हासिल करता ही जा रहा है। उसके दिल में भारत की एक होनहार बेटी कल्पना चावला को खोने के जख्म अभी तक हरे हैं। हरियाणा की इस लाडली को खोने का गम देश अभी तक नहीं भुला पाया है।
भारत के लिए यह घटना िएक मौका भी हो सकती है और सबक भी। बोइंग के स्टारलाइनर में खराबी के बाद कंपनी की साख पर सवाल खड़े हो गये हैं। स्पेस ट्रैवल में पैदा हुई इस जगह को भरने के लिए भारत को तैयार रहना चाहिए। हमारा गगनयान मिशन अगले साल जाने वाला है और उसकी सफलता के बल पर हम खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा दावेदार बना सकते हैं।
सुनीता विलियम्स की महान उपलब्धि पर हमें भी गर्व होगा क्योंकि भारत की मिट्टी से उसका ताल्लुक है पर जब तक वह सुरक्षित नहीं लौट आये, हमारी चिन्ता स्वाभाविक है।
कमला हैरिस
दूसरी भारतवंशी महिला जो अभी विश्व रंगमंच पर चर्चा में हैं वे हैं कमला हैरिस। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए हो रहे चुनाव में वे प्रार्थी हैं एवं पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए चुनौती बनी हुई हैं। चुनाव में अभी तक कमला ने अच्छी बढ़त बनायी है और उनके नवम्बर में होने वाले चुनाव में जीत की भी संभावना है। किन्तु भारतीय मूल की इस महिला पर और कोई नहीं स्वयं ट्रम्प जिस ढंग से कीचड़ उछाल रहे हैं, वह बेहद आपत्तिजनक है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रथ सोशल पर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किया है। न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक पोस्ट में लिखा है कि हैरिस ने शारीरिक संबंधों का इस्तेमाल कर राजनीति में अपने कैरियर को आगे बढ़ाया है। दरअसल, 1990 के दशक में हैरिस उम्र में 30 साल बड़े सैन फ्रांसिस्को के पूर्व मेयर बिली ब्राउन के साथ रिलेशनशिप में थी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर 1995 में ह्वाइट हाउस की एक ईंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ शारीरिक संबंध होने के आरोप लगे थे। हालांकि टेलीविजन एड्रेस में क्लिंटन ने कहा था कि उनका लेविंस्की से कोई संबंध नहीं था पर क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया था। इस कंटोवर्सी का खामियाजा डेमोक्रेटिक पार्टी को राष्ट्रपति चुनाव में उठाना पड़ा था। 10 दिनों में दूसरी बार ट्रम्प ने कमला हैरिस पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इससे पहले ट्रम्प ने कमला की नस्लीय पहचान पर भी सवाल उठाये थे।
इस तरह भारतवंशी दोनों महिलाएं अमेरिका में अपनी बड़ी उपलब्धि के लिए जूझ रही है। यह एक महज इत्तेफाक है कि भारत में जहां महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है भारतीय मूल की दो वीरांगनायें भी विश्व पटल पर अपने उच्च स्थान के लिए संघर्षशील है। ऐसा लगता है आने वाला समय भारतीय नारी का है।
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