बंगाल में नये युग की शुरुआत
पश्चिम बंगाल में चुनाव इस बार असाधारण स्थिति में हुआ, उसका उपसंहार भी अजीबोगरीब कहा जा सकता है और चुनाव पटाक्षेप के बाद भी राजनीतिक बादल उमड़-घूमड़ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। सारी अटकलबजियों को दरकिनार नतीजा सुनकर दांत तले उंगली दबानी पड़ी। भाजपा को इतनी बड़ी सफलता मिलेगी यह तो भगवा खेमा ने भी नहीं सोचा था। किसी को आभास भी नहीं था कि दीदी को इस कदर करारी पराजय का सामना करना पड़ेगा। सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने चुनाव के नतीजे को स्वीकार नहीं किया और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना की बात कही है। आने वाला समय ही बताएगा, बंगाल किन परिस्थितियों से गुजरेगा। जनता जनार्दन के जनादेश के बाद भी उसे स्वीकार नहीं करके क्या नया संकट पैदा करने की कोशिश हो रही है, इस बारे में कई अटकलबाजियां लग रही है। बंगाल कभी भी इस तरह की राजनीतिक स्थिति में नहीं गुजरा। राज्य में परिवर्तन हुए और सरकारें बदली किंतु आज जैसी स्थिति पहले नहीं देखी गई। आने वाले समय में शांति का आलम रहेगा और जो बादल गरजते हैं, बरसते नहीं, वाली कहावत चरितार्थ होगी, कहना मुश्किल है।
बंगाल में परिवर्तन सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं है, पूरी विचारधारा बदली हुई नजर आती है। बंगाल जो आज सोचता है वह भारत कल सोचता है -केठीक विपरीत भारत में भगवा लहराने के लगभग अंतिम पड़ाव में बंगाल ने इसे स्वीकार किया है। जो प्रांत कांग्रेस के शासन में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लीगेसी को आगे ले गया और फिर वहां लाल सूर्योदय हुआ। इसी बीच नक्सली के रूप में चरम बामपंथ में गोता लगाते हुए बामपंथ को अलविदा कहकर ममता के नेतृत्व में तृणमूल के रूप में कथित धर्मनिरपेक्ष सरकार 15 वर्ष तक सत्ता में थी। 2021 में भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बंगाल में परिवर्तन के लिए जी जान से कोशिश की पर उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली। इस बार किसी ने सोचा नहीं था कि बंगाल का जन मानस ममता एवं उसकी उनकी सरकार के विरोध इतना उद्वेलित है। एग्जिट पोल में भी टक्कर बराबर की देखी गई किंतु 4 मईें को जब परिणाम निकला तो राजनीतिक विश्लेषकों के होश उड़ गए। संभवत भाजपा ने भी नहीं सोचा कि बंगाल अवाम उन पर इस कदर भरोसा करेगा। पूरा चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ा गया, घुसपैठियों को बाहर का दरवाजा दिखाने की आक्रामकता से लड़ा गया। इस बार ऐसा भी हुआ कि सभी दलों ने लोकतंत्र में अपने भाग्य आजमाये थे। कांग्रेस भी सभी सीटों पर लड़ी और वामपंथी सीपीएम के नेतृत्व में इंडिया सेकुलर फ्रंट के साथ सभी 294 सीटों पर भाग्य आजमाया। हुमायूं कबीर की नई पार्टी भी मैदान में थी और ओवैसी ने भी अकेले ताल ठोकी। किसी पार्टी का किसी से गठबंधन नहीं हुआ।
चुनाव की पहली बयार में वोटों की सुनामी हुई और अभूतपूर्व 93' मताधिकार का प्रयोग चौंकाने वाला था। दूसरे चरण में भी वैसा ही जोश था। मताधिकार की इतनी प्रबल जागरुकता पहले कभी नहीं देखी गई।
खैर, भाजपा की प्रचंड जीत के साथ जय श्री राम के गगन भेदी नारों के साथ कोलकाता के उन इलाकों में भी जुलूस निकाले जहां धार्मिक टकराव का खतरा था पर कोई घटना नहीं हुई। लेकिन दूसरे दिन जीत के आगोश में डूबे लोग तृणमूल दफ्तरों को निशाना बनाने के साथ ही न्यू मार्केट के आसपास मांस की दुकानों में तोडफ़ोड़ की। तृणमूल के प्रवक्ता के अनुसार 70 से अधिक पार्टी दफ्तरों पर भाजपाइयों ने कब्जा कर लिया। ऐसे में भाजपा के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य को भी यह कहना पड़ा कि जो लोग पार्टी का झंडा लेकर हुड़दंग कर रहे हैं उनके खिलाफ पार्टी कार्रवाई की जाएगी लेकिन उनका यह भी कहना था कि तृणमूल के लोग ही भाजपा का झंडा लेकर हिंसा कर रहे हैं। खैर, जो भी हो ऐसे लोगों को संयत करने की जिम्मेदारी नई सरकार पर है।
सबसे दर्दनाक घटना चुनाव नतीजे के अगले दिन यानी 5 मई को हुई जिसमें भावी मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव को मध्यमग्राम में रास्ते पर गोली मारी गई और उसकी मृत्यु हो गई। मात्रा 38 वर्ष के भाजपा कर्मी की हत्या सुनियोजित साजिश के तहत की गई, स्वयं शुभेंदु ने यह कहा। पेशेवर हत्यारे ने फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहन और ऑस्ट्रेलिया रिवाल्वर का प्रयोग इस वारदात को अंजाम देने के लिए किया। इससे पता लगता है कि यह स्थानीय घटना नहीं बल्कि टारगेट किलिंग है। इसके पीछे कौन है यह तलाश करने की जिम्मेदारी पुलिस की है। लेकिन घटना से आम आदमी बड़े दबाव और तनाव में है। संयोग से शुभेंदु का नाम मुख्यमंत्री के रूप में घोषित हो गया है एवं अहम गृह विभाग उनके पास रहने की संभावना है। आशा है शीघ्र ही यह गुत्थी सुलझेगी कि शुभेंदु साहब के पीएम की किसने और किस मकसद से हत्या की है। माननीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव अभियान के दौरान अपराधियों को उल्टा लटका कर सीधा करने की चेतावनी दी थी। इससे लोगों में आशा जगी है कि अपराध को आमूल चूल खत्म करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
ऐसी घटना नई सरकार को अभी से चुनौती देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान को सम्मान देना जरूरी हो गया है जिसमें उन्होंने कहा कि 'अब बदला नहीं बदलाव की जरूरत है।
नयी सरकार जनता की आकांक्षा के अनुरूप बंगाल को आर्थिक रूप से समृद्ध करेगी और राज्य में कानून व्यवस्था को नियंत्रण में रखने का पूरा प्रयास करेगी। कहना न होगा कि विपक्षी दल या विरोधियों की भी जिम्मेवारी है कि वे प्रशासन को सहयोग करें।
Dear Newar ji,
ReplyDeleteI congratulate u for writing a most comprehensive analysis of election results in Bengal n the trend setting in the minds of people. I found this Sunday Reflection very objective n according to what Bengal thinks today. It’s really challenging to present the reality n speaking the truth through ur journalistic skills. May God inspire u to write more such reflective n too the point mind blowing write ups. Fr Sunil Rosario
बिल्कुल सही कहा आपने - बंगाल में सिर्फ राजनीतिक परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि पूरी विचारधारा बदली हुई नजर आ रही है। नीतियां अपनी जगह है, परंतु ये सच है कि वामपंथ शासन में बंगाल ने बहुत कुछ खोया है। विडंबना यह है कि सुश्री ममता बनर्जी जिनसे आम जनता को बहुत अपेक्षाएं थी, भी स्थिति को सुधार नहीं पायीं, अपितु कुछ और बुराइयां भी सत्ता के साथ जुड़ गई। आशा है भाजपा शासन में इसमें कुछ सुधार होगा, और पश्चिम बंगाल वापस अपने पुराने वैभव के रस्ते पर कदम रखेगा।
Deleteस्टीक विश्लेषण
ReplyDeleteExcept from leaders of any party, common people of not only West Bengal but India wants prosperity in his life. This can only be achieved with the help of Business & Latest technology. So the Govt of West Bengal should look forward to the benefit of common people. I am very much thankful to you for raising issues for the state & Grate Nation.
ReplyDeleteनिष्पक्ष एवं सटीक चुनावी समीक्षा।👍
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