मार्च का महीना, एक अनार सौ बीमार - वर्ल्ड कप से वर्ल्ड वार तक

 मार्च का महीना, एक अनार सौ बीमार

वर्ल्ड कप से वर्ल्ड वार तक

इस बार मार्च के महीने ने ढेर सारी सुर्खियां बटोरी। वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होता है पर इस बार कई खुराफातों की शुरुआत इसी महीने हो गई। 2-3 मार्च होली की रंगीन शोखियों में गुजरी। होलिका जली फिर कईयों ने 3 और बहुतों ने 4 मार्च को होली में रंगों से शराबोर किया। रंगों के त्यौहार की धूम लम्बी चली। कवि सम्मेलनों में कई हास्य कवियों ने आसन जमाया। डा. कुमार विश्वास का प्रतीक्षित कवि सम्मेलन 1 और 2 मार्च को धनोधान्य के डेढ़ हजार की क्षमता वाले ऑडिटोरियम में होना था पर इस ‘कवि नम्बर वन’ के कोलकाता में सारे कार्यक्रम रद्द कर दिये गये। कुमार के कोलकाता आगमन के पहले ही उन्हें खबर कर दी गई कि आप आने का कष्ट न करें क्योंकि जिन कवि सम्मेलनों में आप बुलाये गये हैं, आयोजकों ने उन्हें रद्द कर दिया गया है। ‘‘ऊपर से हुक्म था, घटायें भी क्या करें।’’ इसके पहले वाले दिन बंगाल के मतदाताओं की सेमीफाइनल सूची बन कर तैयार हो गई थी जिसके चलते राजनीति का बाजार गर्म हो चुका था। कुमार विश्वास की खानापूर्ति तो नहीं हुई पर योगियों के मंच योगिक संघ का होली हास्य कवि सम्मेलन कला मंदिर में 4 मार्च को तडक़े हुआ। पैंतीस वर्षें सें खुले मैदान में होनेवाले देश में एकमात्र कवि सम्मेलन पहली बार बंद ऑडिटोरिम में हुआ। सोचा भी नहीं था कि सुबह 7 बजे कवियों को सुनने आयेंगे पर यह आशंका निर्मूल साबित हुई। साढ़े सात बजे तक तो कला मंदिर खचाखच भर गया था। ठंडाई, पकोड़ी, नाश्ता खाकर सुधि श्रोता सीटों पर डट गये थे। कला मंदिर का पूरा सभागार नीचे से ऊपर तक खचाखच था। कुमार विश्वास के शो को रद्द किये जाने से जो चौपाल चर्चा हुई उसको ब्रेक लग गया।


बोर्ड परीक्षाओं का सिलसिला शुरू हो गया। बोर्ड वाले छात्रों के जीवन का सबसे अहम टाइम मार्च में ही होता है। खैर इसी महीने परीक्षा की सरगर्मी को बोर्ड परीक्षाओं से निजात मिली। प्रैक्टिल परीक्षाएं भी निपट गई और किशोर किशोरियों ने राहत की सांस ली। 8 मार्च महिलाओं का दिन था। पुरुष खामोश थे क्योंकि कहा जाता है हर सफल पुरुष के पीछे महिला का ही हाथ होता है। कुछ दिन ही मुश्किल से गुजरे होंगे कि वर्ल्ड कप का खुमार सिर चढक़र बोलने लगा। ऐसा माहौल बन गया जैसे वल्र्ड कप से बड़ा कोई ईवेन्ट दुनिया ने बनाया ही नहीं। भारत की शानदार जीत ने क्रिकेट प्रेमियों और राष्ट्र प्रेमियों की झोली भर दी। ‘बहुत दिया देने वाले ने लेकिन आंचल ही ना समाये तो क्या की जै।’ वर्ल्ड कप जीत के ढोल नगाड़े के तुरंत बाद ही फिर गर्जन तर्जन शुरू हुआ। वर्ल्ड वार की आशंका से दुनिया सिहर उठी और पेट्रोल की बू आने लगी। वल्र्ड कप की आनंदानुभूति का मजा किरकिरा हो गया। गैस की गन्श्ध से लोग नाक भौं सिकोडऩे लगे। हमारे प्रधानमंत्री जी के दोस्त ट्रम्प की टैरिफ की सनक से हम परेशान थे कि इजरायल ने ईरान पर हमला से ‘वल्र्ड वार’ की आशंका सताने लगी।

सर्दी भी कड़ाके की इुई थी लेकिन वल्र्ड वार और पेट्रोल की गर्मी से अचानक गर्मी शुरू हो गई। गर्मी का असर हुआ तब तक प्रकृति ने अचानक करवट बदल ली। बिन मौसम मल्हार की तरह बारिश की फुहार से मौसम का मिजाज ही बदल गया। गर्मी और बारिश की युगलबन्दी सब मार्च के दूसरे हफ्ते में कभी खुशी कभी गम की कोलाज बनकर आ पड़ी। तब तक पश्चिम और मध्य एशियों में युद्ध का बिगुल बज गया। दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमरीका और इजरायल के यहूदियों ने मिलकर दुनिया को वार के दरवाजे पर ला खड़ा कर दिया। ईरान और खाड़ी देशों का भविष्य धुंधला दिखाई देने लगा। दुनिया बारुद के ढेर पर बैठी है, कब बारुद फट जाये कहना मुश्किल था। रमजान के पवित्र महीने में लड़ाई की धड़धड़ाहट ने इफ्तार की दावत में खलल पैदा की। ईरान के बेताज बादशह खामनेई की हत्या से मध्य एशिया को नये संकट में घेर लिया। संकट का महीना भी मार्च ही था। ‘मार्च’ सैनिकों के मार्च की तरह युद्ध के मैदान में कूद पड़ा। रूस-यूके्रेन वार के तीन साल बा मुलायजा चल रहे हैं। तेल के दाम बढ़ रहे हैं गैस की कमी ने चुल्हे चक्की सब की बाट लगा दी। गृह लक्षियों के लिये मार्च का महीना आसाढ़ के महीने की तरह पसीना छुड़ाने लगा।

मार्च का दो तिहाई महीना इसी आपा धापी में गुजर गया है। युद्ध अभी पूरे आगोश में है। कुछ राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि लड़़ाई लम्बी चलेगी। कोविड के बाद कुछ समय चैन से बीता था किन्तु अब कोविड से हमारा भी ज्यादा विकराल राक्षस हमारी नींद हराम किये हुए हे। लड़ाई से हमारा कोई सीधा लेना देना नहीं है किन्तु युद्ध की अग्रिशिखा हमारे दरवाजे तक आ पहुंची है। हम कितना ही मुंह छिपायें पर युद्ध की विभीषिका हमारी तरफ देख कर हमें चिढ़ा रही है। ईद शांति और भाईचारे का पर्व है पर आंख का अंधा नाम नयनसुख की तरह ‘ईद’ का चांद लगता है शीतलता लुटाने की बजाय हमारी शान्ति और सौहार्द को खसोटने में लगा हुआ है।

इस अंग्रेजी कैलेन्डर के तीसरे महीने में हिन्दू नववर्ष भी सनातनी पैगाम लेकर आया है। विक्रमादित्य द्वारा शुरू किया वर्ष 2083 वें वर्ष में प्रवेश कर गया। नये वर्ष पर हम आध्यात्मिक और सद्भाव के आंचल में बड़े सुकून से हमने अपना वाला नया वर्ष मनाया है।

इतने सारे घटनाक्रम की व्यस्तता के बाद भी मार्च महीने के बीतने में एक सप्ताह अभी बाकी है। 23 मार्च यानि सोमवार को अमर शहीद भगत सिंह की शहरात के लिये नतमस्तक भारतवासी अपने युवा शहरीद का स्मरण करेंगे। कुछ लोग उनके लिये लाल सलाम भी करते हैं। चलिये इस मार्च के ऐतिहासिक महीने को हम सलाम करते हैं। अगले महीने से शुरू होने वाली उष्णता को आप झेल सें इसके लिये धैर्य की कामना करते हैं। यह चुनाव का पर्व भी है जब हमारे राजनीतिक नेता बंगाल की कमान सम्हालेंगे। फिलहाल मार्च का महीना अपने नाज-नखरे के साथ ठीक से गुजर जाये, इस कामना के साथ कलम को विराम देता हंू।

चलिये हमसे लीजिये होली, ईद, हिन्दू नववर्ष एवं अग्रिम रामनवमी की शुभकामनायें। वर्ल्ड कप के लिये हमारे खिलाडिय़ों को बधाई। हम सुरक्षित और महफूज़ रहें।  

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