हवाई यात्रियों पर गिरी गाज - 25 सालों में नौ विमान कंपनियां बंद इंडिगो भी उसी राह पर?


हवाई यात्रियों पर गिरी गाज

25 सालों में नौ विमान कंपनियां  बंद 

इंडिगो भी उसी राह पर?

भारत की सबसे भरोसेमंद और सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो बीते एक सप्ताह से अपने इतिहास के सबसे बड़े परिचालन संकट से जूझती नजर आ रही है। सैकड़ों उड़ानों की अचानक रद्द हो जानें से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देशभर के एयरपोर्ट पर सवारियों के बीच अफरातफरी मची हुई है। पिछले रविवार को कुल 2,300 में से 650 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों की भीड़, लंबी कतारें, खोया हुआ सामान और यात्रियों का गुस्सा साफ झलक रहा था। हवाई अड्डों पर रेलवे प्लेटफार्म से भी बुरा दृश्य दे रहा था। 

उड़ानों के रद्द होने से महत्वपूर्ण बैठकों, नौकरी इंटरव्यू और शादी समारोहों तक में यात्रियों को नुकसान उठाना पड़ा। इतना ही नहीं, संकट का असर हवाई किरायों पर भी दिखा। दिल्ली से बेंगलुरु तक की फ्लाइट का किराया 40,000 रुपये से ऊपर पहुंच गया। सरकार ने स्थिति को संभालते हुए छह दिसंबर को सभी रूट्स पर किराए की सीमा तय की। अन्य सेक्टरों में भी यात्रियों को भरकम किराया देना पड़ा। 

इंडिगो की लगातार रद्द होती उड़ानों ने यात्रियों के लिए संकट पैदा कर दिया। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब भारत के विमानन क्षेत्र ने इतनी बड़ी उथल-पुथल हुई है। पहले भी भारत में विमानन कंपनियां संकट से गुजरती रही हैं। यहां तक कि बीते 25 साल में नौ विमानन कंपनियां बंद हो चुकी हैं। 

इंडिगो की लगातार रद्द होती फ्लाइटों ने यात्रियों के लिए संकट की स्थिति पैदा कर दी है। डीजीसीए की तरफ से नवंबर में लाए गए नियमों के तहत सही इंतजाम न कर पाने के बाद एयरलाइन के लिए यह संकट पैदा हुआ। हालांकि, बाद में यात्रियों की परेशानी बढऩे के बाद नियमों को अस्थायी तौर से वापस ले लिया गया। संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि मामले में जवाबदेही तय की जाएगी। जब से यह संकट पैदा हुआ है, तब से इंडिगो पांच हजार से ऊपर उड़ानें रद्द कर चुका है। उड़ानों के रद्द होने से इंडिगो को आर्थिक तौर पर भी नुकसान उठाना पड़ा है। इंडिगो भारत के विमान बाजार में 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। 

इंडिगो भारत में काफी किफायती कीमतों पर घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी मुहैया कराता है। लेकिन नियमों का सबसे ज्यादा असर इंडिगो पर ही देखने को मिला। यह पहली बार नहीं है, जब भारत की कोई एयरलाइन इतनी ऊंचाइयों को छूने के बाद अचानक जमीन पर गिर गई। पिछले 25 वर्षों में नौ प्रसिद्ध एयरलाइंस को वित्तीय संकट के आगे घुटने टेकने पड़े हैं।  आइए जानते है भारत की कौन सी एयरलाइंस पिछले 25 वर्षों में बंद हुई? इसकी क्या वजह थी? इंडिगो का संकट भी क्या इसी तरह के खतरे की घंटी है?

एयर सहारा: एयर सहारा लिमिटेड भारत की एक जानी-मानी प्राइवेट एयरलाइन थी, जिसका मालिकाना हक सहारा इंडिया परिवार ग्रुप के पास है। एयर डेक्कन जैसी नई लो-कॉस्ट कैरियर बहुत सस्ते किराए पर उड़ानें दे रही थी। अप्रैल 2019 में जेटलाइट और जेट एयरवेज दोनों एक साथ बंद हो गए। इसके साथ ही एयर सहारा का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया। 

एयर डेक्कन- 2005 में, रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर जी.आर. गोपीनाथ ने घोषणा की कि वे भारतीयों को एक रुपये से भी कम में हवाई यात्रा की सुविधा देंगे। हर दिन पच्चीस हजार पैसेंजर बजट फ्लाइट में उड़ रहे थे, जबकि शुरू होने के समय यह संख्या 2,000 थी।  लेकिन एयर डेक्कन को घाटा बढऩे के साथ-साथ खर्चों का सामना करना पड़ा। 2007 में कैप्टन गोपीनाथ ने अपनी कंपनी किंगफिशर को बेच दी, जिसके मालिक शराब के बड़े कारोबारी विजय माल्या थे।

पैरामाउंट एयरवेज- पैरामाउंट एयरवेज की शुरुआत 2005 में हुई थी। मदुरै की टेक्सटाइल कंपनी पैरामाउंट ग्रुप ने चेन्नई से इसकी शुरुआत की थी। डीजीसीए ने नेशनल एयरलाइन लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठाया, क्योंकि नेशनल परमिट के लिए कम से कम पांच एयरक्राफ्ट वाले ऑपरेशनल फ्लीट की जरूरत होती है। इसलिए एयरलाइन के लाइसेंस को रद्द करना पड़ा। 

किंगफिशर एयरलाइन- 2005 में शराब कारोबारी विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत की थी। 2012 तक, किंगफिशर के बेड़े में कमी आ गई और भुगतान में देरी के कारण कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। चेक बाउंस होने के कारण गैर-जमानती वारंट जारी हुए, और 950 करोड़ रुपये के आईडीबीआई के बड़े ऋणों ने सीबीआई को इसमें शामिल किया। किंगफिशर एयरलाइन ने 2012 में उड़ानें बंद कर दी। 

जेट एयरवेज- जेट एयरवेज की शुरुआत 1993 में एक एयर-टैक्सी ऑपरेटर के रूप में हुई थी। यह एयरलाइन उद्योग में उस समय एक निजी एयरलाइन बनकर उभरी। कंपनी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि ईंधन और आवश्यक सेवाओं के लिए पैसो की कमी के कारण वह अपना परिचालन बंद कर रही है।

ट्रू जेट- ट्रू जेट ने जुलाई 2015 से अपनी उड़ाने शुरू की थी और उसके पास सात जहाज थे। वह सबसे लंबे समय से सेवा दे रही क्षेत्रीय कंपनी थी। कोविड के दौरान उड़ाने रूक गई जिससे इसकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई थी। 

गो फस्र्ट- गो फस्र्ट ने 2005 में इंडिगो और स्पाइसजेट के साथ ही उड़ान शुरू की थी। जनवरी 2025 में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने बजट एयरलाइन गो फर्स्ट एयरवेज के परिसमापन का आदेश दिया। इसका मतलब कि कंपनी को अपनी संपत्तियां बेचकर कर्ज चुकाने को कहा गया। वित्तीय समस्याओं के कारण विमानन कंपनी ने मई, 2023 में स्वैच्छिक रूप से दिवालिया समाधान प्रक्रिया के लिए आवेदन किया था। गो फस्र्ट का परिचालन तीन मई, 2023 से बंद है। कंपनी ने 2005-06 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए पहली उड़ान के साथ घरेलू परिचालन शुरू किया था। 2018-19 में अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू की थी।  पीडब्ल्यू इंजन की परेशानी के चलते उड़ानें रद्द हुई, जिसके बाद कंपनी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। 

विस्तारा-विस्तारा की शुरुआत जनवरी 2015 में हुई थी। विस्तारा का संचालन टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के बीच संयुक्त उद्यम रूप में हो रहा था। 11 नवंबर 2024 को इसने अपनी आखिरी उड़ान भरी थी। एयर इंडिया में इसका विलय हो गया। 

एआईएक्स कनेक्टस- पहले एयरएशिया इंडिया के नाम से मशहूर एआईएक्स कनेक्ट को टाटा ग्रुप के एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ विलय किया गया। 2024 से, एआईएक्स कनेक्ट के ऑपरेशन और एयरक्राफ्ट एयर इंडिया एक्सप्रेस में शामिल कर दिए गए थे। 

इंडिगो संकट का भी यही हस्र होगा? 

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